Sunday, 3 January 2016

English phrases hindi meaning, इंग्लिश मुहावरे - हिंदी अर्थ

Phrasal Verbs : Hindi Meaning
1. Account for : कारण बताना, हिसाब देना, स्पष्टीकरण देना
2. Ask for something : की माँग करना, के लिए अनुरोध करना
3. Ask for somebody : मिलने या बात करने के लिए संवाद
देना
4. Ask after : किसी के बारे में समाचार पूछना
5. Ask in : अन्दर बुलाना
6. Answer back : मुँह लगे जवाब देना
7. Answer for : जिम्मेदार होना
8. Add to : बढ़ाना
9. Act on/Upon : असर डालना
10. Add up : का योग करना
11. Allow for : ध्यान में लेना
12. Allow of : गुंजाइश रखना
13. Ache for : के लिए या करने के लिए प्रबल इच्छा रखना
14. Abound in/with Something : प्रचुर संख्या या मात्रा
में होना
15. Abide by : विश्वाशी होना, दृढ़ता से पालन करना

Phrasal Verbs : Hindi Meaning
1. Back out : पीछे हटना
2. Back up : समर्थन देना
3. Bank on : भरोसा करना
4. Be off : जाना
5. Bear out : समर्थन देना, साथ देना
6. Beat up : खूब पीटना
7. Blow out : फूँककर बुझाना
8. Blow up : विस्फोट होना, बर्बाद करना
9. Break down : मशीन इत्यादि ख़राब हो जाना, स्वास्थ्य
ख़राब हो जाना
10. Break in : चोरी करने की नीयत से घूसना, बलपूर्वक भीतर
घुसना
11. Break into : तालाबंद मकान या कमरे में जबर्दस्ती घुसना
12. Break out : एकाएक फैलना, चाहे वह लड़ाई हो या महामारी
13. Break with : दोस्ती समाप्त करना, आदत छोड़ना, सम्बन्ध
विच्छेद करना
14. Break up : समाप्त होना, तितर-बितर हो जाना
15. Boil over : उफ़न पड़ना
16. Bring about : उत्पन्न करना
17. Bring under : वश में करना, नियंत्रण में करना
18. Bring round : होश में लाना
19. Bring down : गिराना, कम करना
20. Bring out : प्रकट या प्रकाशित करना
21. Bring up : पालन पोषण करना, पढ़ाना-लिखाना
22. Bring forth : उत्पन्न करना
23. Burn down : जलाकर बर्बाद कर देना, जलकर बर्बाद होना
24. Burn away : बर्बाद हो जाना
25. Burn out : बुझ जाना
26. Burn up : धधकना
27. Burst in : बाधा डालना
28. Burst in/on : अचानक आ जाना
29. Build on/Upon : निर्भर करना
30. Build up : जमना, बढ़ना
31. Build up : धीरे-धीरे बनाना, हासिल करना
32. Brush away : हटा देना, भगा देना
33. Brush aside : ध्यान न देना, उपेक्षा करना
34. Back down : दावा छोड़ देना
35. Back off : दावा छोड़ देना
36. Bail out : जमानत देना
37. Bargain with : सौदा करना
38. Bargain for : स्वीकार करने के लिए तैयार होना
39. Beat down : कीमत कम करने के लिए मनाना
40. Bend down : झुकना
41. Bid up : ऊँची-बोली लगाकर कीमत बढ़ा देना
42. Block up : बंद कर देना, रोकना
43. Blot out : दृष्टि से छिपा देना, बर्बाद कर देना, मिटा देना
44. Blow in/into : शोरगुल करते हुए या प्रसन्नतापूर्वक प्रवेश
करना
45.Boil away : उबालते रहना (कुछ भी अवशेष न रहने तक)
46. Boil down : उबाल कर किसी द्रव की मात्रा को कम कर
देना
47. Branch off : कार, ट्रेन आदि का मुख्य मार्ग छोड़कर अन्य
मार्ग से चलना
48. Branch out : शाखाओं की तरह फैलना
49. Bring along : साथ लाना
50. Bring forward : प्रस्तुत करना, दिखाना, आगे ले जाना

Phrasal verbs : Hindi Meaning
1. Call in : किसी को बुलवाना
2. Call off : समाप्त करना, वापस लेना
3. Call up : याद करना, टेलीफोन करना
4. Call for : माँग करना, आवशयकता होना
5. Call on : थोड़ी देर के लिए जाना या रुकना
6. Call out : बुलाना
7. Call at : किसी के घर या स्थान आदि पर थोड़ी देर के लिए
जाना
8. Call back : वापस बुलाना
9. Call down : प्रार्थना करना
10. Care about : चिंतित होन
11. Care for : पसंद करना
12. Carry away : आपे से बाहर करना, उत्तेजित करना
13. Carry off : जीतना
14. Carry on : जारी रखना, चलना, निभाना
15. Carry out : आज्ञा का पालन करना
16. Cast aside : छोड़ देना, त्याग करना
17. Catch up with : आगे निकलना
18. Catch out : गेंद को लपककर आउट करना
19. Cheer up : ढांढस बँधाना, बढ़ावा देना
20. Cheer up : अधिक प्रसन्न होना या करना
21. Clear away : छँट जाना
22. Clear off : छुटकारा पाना
23. Clear out : प्रस्थान करना, चला जाना
24. Climb down : निचे की ओर आना, उतरना
25. Climb up : बढ़ना
26. Close down : स्थायी रूप से बंद करना
27. Close in on/upon : ढक देना
28. Close with : स्वीकार करना
29. Cloud over : अस्पष्ट करना, ढकना
30. Come about : होना
31. Come across : संयोग से मिलना
32. Come after : पीछा करना
33. Come along : जल्दी करना
34. Come at : पहुँचना, प्राप्त करना
35. Come at : हमला करना
36. Come away from : से अलग होना, जुदा होना
37. Come back : लौटना, वापस आना
38. Come between : सम्बन्ध में हस्तक्षेप करना
39. Come by : प्रयास से प्राप्त करना
40. Come down : उतरना, गिरना, नीचे आना
41. Come forward : अपने आपको प्रस्तुत करना
42. Come in : अन्दर आना
43. Come in for : हासिल करना
44. Come in on : भाग लेना
45. Come of : संतान होना, से आना
46. Come off : होना, हटाये जाने योग्य होना
47. Come off : से अलग होना
48. Come on : पीछे आना
49. Come out : बाहर निकलना, प्रकाशित होना
50. Come out with : कहना
51. Come over : दूर से आना
52. Come round : चक्कर काटकर आना
53. Come through : गंभीर बिमारी, घाव आदि से चंगा होना
54. Come to : होश में आना
55. Come under : के अधीन होना
56. Come up : प्रस्तुत होना, उठना
57. Come up with : सामना करना
58. Come up to : पहुँचना
59. Come upon : आक्रमण करना
60. Come down : शांत होना
61. Count on/upon : भरोसा करना
62. Crop with : बोना
63. Crop up : आशा के विपरीत दिखाई पड़ना
64. Crowd round : गोलबंद होना
65. Cry down : निंदा करना
66. Cry for : माँग करना
67. Cry off : मुकर जाना
68. Cry out : चिल्लाना
69. Cry up : प्रयास करना, बढ़ा-चढ़ा कर कहना
70. Cut across : ज्यादा छोटे मार्ग से गुजरना
71. Cut away : काट कर हटा देना
72. Cut back : घटाना
73. Cut down : काटकर गिराना, छोटा करना
74. Cut down on : खपत में कमी करना
75. Cut into : हस्तक्षेप करना
76. Cut in : हस्तक्षेप करना
77. Cut off : काटकर अलग करना
78. Cut out : कार्य करना बंद कर देना
79. Cut out : काटकर हटाना
80. Cut up : बर्बाद कर देना

Saturday, 26 December 2015

हिंदी पर्यायवाची शब्द


अग्नि - आग, अनल, पावक, दहन, वह्नि, कृशानु।
अपमान - अनादर, अवज्ञा, अवहेलना, अवमान, तिरस्कार।
अलंकार - आभूषण, भूषण, विभूषण, गहना, जेवर।
अहंकार- दंभ, गर्व, अभिमान, दर्प, मद, घमंड, मान।
अमृत- सुधा, अमिय, पीयूष, सोम, मधु, अमी।
असुर- दैत्य, दानव, राक्षस, निशाचर, रजनीचर, दनुज, रात्रिचर,
तमचर।
अतिथि- मेहमान, अभ्यागत, आगन्तुक, पाहूना।
अनुपम- अपूर्व, अतुल, अनोखा, अदभुत, अनन्य।
अर्थ- धन्, द्रव्य, मुद्रा, दौलत, वित्त, पैसा।
अश्व- हय, तुरंग, घोड़ा, घोटक, हरि, बाजि, सैन्धव।
अंधकार- तम, तिमिर, तमिस्र, अँधेरा, तमस, अंधियारा।

आम- रसाल, आम्र, सौरभ, मादक, अमृतफल, सहुकार।
आग- अग्नि, अनल, हुतासन, पावक, दहन, ज्वलन, धूमकेतु, कृशानु,
वहनि, शिखी, वह्नि।
आँख- लोचन, नयन, नेत्र, चक्षु, दृग, विलोचन, दृष्टि, अक्षि।
आकाश- नभ, गगन, अम्बर, व्योम, अनन्त, आसमान, अंतरिक्ष,
शून्य, अर्श।
आनंद- हर्ष, सुख, आमोद, मोद, प्रमोद, उल्लास।
आश्रम- कुटी, विहार, मठ, संघ, अखाडा।
आंसू- नेत्रजल, नयनजल, चक्षुजल, अश्रु।
आत्मा- जीव, देव, चैतन्य, चेतनतत्तव, अंतःकरण।

इच्छा- अभिलाषा, अभिप्राय, चाह, कामना, लालसा, मनोरथ,
आकांक्षा, अभीष्ट।
इन्द्र- सुरेश, सुरेन्द्र, देवेन्द्र, सुरपति, शक्र, पुरंदर, देवराज,
महेन्द्र, मधवा, शचीपति, मेघवाहन, पुरुहूत, यासव।
इन्द्राणि - इन्द्रवधू, मधवानी, शची, शतावरी, पोलोमी।

ईश्वर- परमात्मा, प्रभु, ईश, जगदीश, भगवान, परमेश्वर,
जगदीश्वर, विधाता।

उपवन - बाग़, बगीचा, उद्यान, वाटिका, गुलशन।
उक्ति - कथन, वचन, सूक्ति।
उग्र - प्रचण्ड, उत्कट, तेज, महादेव, तीव्र, विकट।
उचित - ठीक, मुनासिब, वाज़िब, समुचित, युक्तिसंगत, न्यायसंगत,
तर्कसंगत, योग्य।
उच्छृंखल - उद्दंड, अक्खड़, आवारा, अंडबंड, निरकुंश, मनमर्जी,
स्वेच्छाचारी।
उजड्ड - अशिष्ट, असभ्य, गँवार, जंगली, देहाती, उद्दंड, निरकुंश।
उजला - उज्ज्वल, श्वेत, सफ़ेद, धवल।
उजाड - जंगल, बियावान, वन।
उजाला - प्रकाश, रोशनी, चाँदनी।
उत्कर्ष- समृद्धि, उन्नति, प्रगति, प्रशंसा, बढ़ती, उठान।
उत्कृष्ट - उत्तम, उन्नत, श्रेष्ठ, अच्छा, बढ़िया, उम्दा।
उत्कोच - घूस, रिश्वत।
उत्पति - उद्गम, पैदाइश, जन्म, उद्भव, सृष्टि, आविर्भाव, उदय।
उद्धार - मुक्ति, छुटकारा, निस्तार, रिहाई।
उपाय - युक्ति, साधन, तरकीब, तदबीर, यत्न, प्रयत्न।

ऊधम - उपद्रव, उत्पात, धूम, हुल्लड़, हुड़दंग, धमाचौकड़ी।

ऐक्य - एकत्व, एका, एकता, मेल।
ऐश्वर्य - समृद्धि, विभूति।

ओज - तेज, शक्ति, बल, वीर्य।
ओंठ- ओष्ठ, अधर, होठ।

औचक - अचानक, यकायक, सहसा।
औरत - स्त्री, जोरू, घरनी, घरवाली।

ऋषि - मुनि, साघु, यति, संन्यासी, तत्वज्ञ, तपस्वी।

कच - बाल, केश, कुन्तल, चिकुर, अलक, रोम, शिरोरूह।
कमल- नलिन, अरविन्द, उत्पल, राजीव, पद्म, पंकज, नीरज, सरोज,
जलज, जलजात, शतदल, पुण्डरीक, इन्दीवर।
कबूतर - कपोत, रक्तलोचन, पारावत, कलरव, हारिल।
कामदेव - मदन, मनोज, अनंग, काम, रतिपति, पुष्पधन्वा, मन्मथ।
कण्ठ - ग्रीवा, गर्दन, गला, शिरोधरा।
कृपा- प्रसाद, करुणा, दया, अनुग्रह।
किताब- पोथी, ग्रन्थ, पुस्तक।
किनारा - तीर, कूल, कगार, तट।
कपड़ा- चीर, वसन, पट, अंशु, कर, मयुख, वस्त्र, अम्बर, परिधान।
किरण- ज्योति, प्रभा, रश्मि, दीप्ति, मरीचि।
किसान- कृषक, भूमिपुत्र, हलधर, खेतिहर, अन्नदाता।
कृष्ण- राधापति, घनश्याम, वासुदेव, माधव, मोहन, केशव, गोविन्द,
गिरधारी।
कान- कर्ण, श्रुति, श्रुतिपटल, श्रवण, श्रोत, श्रुतिपुट।
कोयल- कोकिला, पिक, काकपाली, बसंतदूत, सारिका, कुहुकिनी,
वनप्रिया।
क्रोध- रोष, कोप, अमर्ष, कोह, प्रतिघात।कीर्ति - यश, प्रसिद्धि।

खग - पक्षी, द्विज, विहग, नभचर, अण्डज, शकुनि, पखेरू।
खंभा स्तूप, स्तम्भ, खंभ।
खल - दुर्जन, दुष्ट, घूर्त, कुटिल।
खून - रक्त, लहू, शोणित, रुधिर।

गज- हाथी, हस्ती, मतंग, कूम्भा, मदकल ।
गाय- गौ, धेनु, सुरभि, भद्रा, रोहिणी।
गंगा- देवनदी, मंदाकिनी, भगीरथी, विश्नुपगा, देवपगा, ध्रुवनंदा,
सुरसरिता, देवनदी, जाह्नवी, त्रिपथगा।
गणेश- विनायक, गजानन, गौरीनंदन, गणपति, गणनायक, शंकरसुवन,
लम्बोदर, महाकाय, एकदन्त।
गृह- घर, सदन, गेह, भवन, धाम, निकेतन, निवास, आलय, आवास,
निलय, मंदिर।
गर्मी- ताप, ग्रीष्म, ऊष्मा, गरमी, निदाघ।
गुरु - शिक्षक, आचार्य, उपाध्याय।

घट - घड़ा, कलश, कुम्भ, निप।
घर - आलय, आवास, गेह, गृह, निकेतन, निलय, निवास, भवन, वास,
वास-स्थान, शाला, सदन।
घृत - घी, अमृत, नवनीत।
घास - तृण, दूर्वा, दूब, कुश, शाद।

चरण- पद, पग, पाँव, पैर, पाद।चतुर - विज्ञ, निपुण, नागर, पटु,
कुशल, दक्ष, प्रवीण, योग्य।
चंद्रमा- चाँद, हिमांशु, इंदु, विधु, तारापति, चन्द्र, शशि, हिमकर,
राकेश, रजनीश, निशानाथ, सोम, मयंक, सारंग, सुधाकर, कलानिधि।
चाँदनी - चन्द्रिका, कौमुदी, ज्योत्स्ना, चन्द्रमरीचि, उजियारी,
चन्द्रप्रभा, जुन्हाई।
चाँदी - रजत, सौध, रूपा, रूपक, रौप्य, चन्द्रहास।
चोटी - मूर्धा, शीश, सानु, शृंग।

छतरी - छत्र, छाता, छत्ता।
छली - छलिया, कपटी, धोखेबाज।
छवि - शोभा, सौंदर्य, कान्ति, प्रभा।
छानबीन - जाँच, पूछताछ, खोज, अन्वेषण, शोध, गवेषण।
छैला - सजीला, बाँका, शौकीन।
छोर - नोक, कोर, किनारा, सिरा।

जल- अमृत, सलिल, वारि, नीर, तोय, अम्बु, उदक, पानी, जीवन,
पय, पेय।
जगत - संसार, विश्व, जग, जगती, भव, दुनिया, लोक, भुवन।
जीभ - रसना, रसज्ञा, जिह्वा, रसिका, वाणी, वाचा, जबान।
जंगल- विपिन, कानन, वन, अरण्य, गहन, कांतार, बीहड़, विटप।
जेवर - गहना, अलंकार, भूषण, आभरण, मंडल।
ज्योति - आभा, छवि, द्युति, दीप्ति, प्रभा, भा, रुचि, रोचि।

झूठ- असत्य, मिथ्या, मृषा, अनृत।




तरुवर - वृक्ष, पेड़, द्रुम, तरु, विटप, रूंख, पादप।
तलवार - असि, कृपाण, करवाल, खड्ग, चन्द्रहास।
तालाब- सरोवर, जलाशय, सर, पुष्कर, पोखरा, जलवान, सरसी,
तड़ाग।
तीर - शर, बाण, विशिख, शिलीमुख, अनी, सायक।

दास- सेवक, नौकर, चाकर, परिचारक, अनुचर, भृत्य, किंकर।
दधि - दही, गोरस, मट्ठा, तक्र।
दरिद्र- निर्धन, ग़रीब, रंक, कंगाल, दीन।
दिन- दिवस, याम, दिवा, वार, प्रमान, वासर, अह्न।
दीन - ग़रीब, दरिद्र, रंक, अकिंचन, निर्धन, कंगाल।
दीपक - दीप, दीया, प्रदीप।
दुःख- पीड़ा,कष्ट, व्यथा, वेदना, संताप, शोक, खेद, पीर, लेश।
दूध- दुग्ध, क्षीर, पय, गौरस, स्तन्य।
दुष्ट- पापी, नीच, दुर्जन, अधम, खल, पामर।
दाँत - दशन, रदन, रद, द्विज, दन्त, मुखखुर।
दर्पण- शीशा, आरसी, आईना, मुकुर।
दुर्गा- चंडिका, भवानी, कुमारी, कल्याणी, महागौरी, कालिका, शिवा,
चण्डी, चामुण्डा।
देवता- सुर, देव, अमर, वसु, आदित्य, लेख, अजर, विबुध।
देह - काया, तन, शरीर, वपु, गात।

धन- दौलत, संपत्ति, सम्पदा, वित्त।
धरती- धरा, धरती, वसुधा, ज़मीन, पृथ्वी, भू, भूमि, धरणी, वसुंधरा,
अचला, मही, रत्नवती, रत्नगर्भा।
धनुष- चाप्, शरासन, कमान, कोदंड, धनु।

नदी- सरिता, तटिनी, सरि, सारंग, जयमाला, तरंगिणी, दरिया,
निर्झरिणी।
नया- नूतन, नव, नवीन, नव्य।
नाव- नौका, तरणी, तरी।

पवन- वायु, हवा, समीर, वात, मारुत, अनिल, पवमान, समीरण,
स्पर्शन।
पहाड़- पर्वत, गिरि, अचल, शैल, धरणीधर, धराधर, नग, भूधर,
महीधर।
पक्षी- खेचर, दविज, पतंग, पंछी, खग, चिडिया, गगनचर, पखेरू,
विहंग, नभचर।
पति- स्वामी, प्राणाधार, प्राणप्रिय, प्राणेश, आर्यपुत्र।
पत्नी- भार्या, वधू, वामा, अर्धांगिनी, सहधर्मिणी, गृहणी, बहु,
वनिता, दारा, जोरू, वामांगिनी।
पुत्र- बेटा, आत्मज, सुत, वत्स, तनुज, तनय, नंदन।
पुत्री- बेटी, आत्मजा, तनूजा, सुता, तनया।
पुष्प- फूल, सुमन, कुसुम, मंजरी, प्रसून, पुहुप।

फूल - पुष्प, सुमन, कुसुम, गुल, प्रसून।

बादल- मेघ, घन, जलधर, जलद, वारिद, नीरद, सारंग, पयोद,
पयोधर।
बालू- रेत, बालुका, सैकत।
बन्दर- वानर, कपि, कपीश, हरि।
बिजली- घनप्रिया, इन्द्र्वज्र, चंचला, सौदामनी, चपला, दामिनी,
ताडित, विद्युत।
बगीचा - बाग़, वाटिका, उपवन, उद्यान, फुलवारी, बगिया।
बाण - सर, तीर, सायक, विशिख, शिलीमुख, नाराच।बाल - कच,
केश, चिकुर, चूल।
ब्रह्मा - विधि, विधाता, स्वयंभू, प्रजापति, पितामह, चतुरानन,
विरंचि, अज, कर्तार, कमलासन, नाभिजन्म, हिरण्यगर्भ।
बलदेव - बलराम, बलभद्र, हलायुध, राम, मूसली, रोहिणेय,
संकर्षण।
बहुत - अनेक, अतीव, अति, बहुल, प्रचुर, अपरिमित, प्रभूत, अपार,
अमित, अत्यन्त, असंख्य।
ब्राह्मण - द्विज, भूदेव, विप्र, महीदेव, भूमिसुर, भूमिदेव।

भय - भीति, डर, विभीषिका।
भाई - तात, अनुज, अग्रज, भ्राता, भ्रातृ।
भूषण- जेवर, गहना, आभूषण, अलंकार।
भौंरा - मधुप, मधुकर, द्विरेप, अलि, षट्पद,भृंग, भ्रमर।

मनुष्य- आदमी, नर, मानव, मानुष, मनुज।
मदिरा- शराब, हाला, आसव, मधु, मद।
मोर- केक, कलापी, नीलकंठ, नर्तकप्रिय।
मधु- शहद, रसा, शहद, कुसुमासव।
मृग- हिरण, सारंग, कृष्णसार।
मछली- मीन, मत्स्य, जलजीवन, शफरी, मकर।
माता- जननी, माँ, अंबा, जनयत्री, अम्मा।
मित्र- सखा, सहचर, साथी, दोस्त।

यम - सूर्यपुत्र, जीवितेश, श्राद्धदेव, कृतांत, अन्तक, धर्मराज,
दण्डधर, कीनाश, यमराज।
यमुना - कालिन्दी, सूर्यसुता, रवितनया, तरणि-तनूजा, तरणिजा,
अर्कजा, भानुजा।
युवति - युवती, सुन्दरी, श्यामा, किशोरी, तरुणी, नवयौवना।

रमा - इन्दिरा, हरिप्रिया, श्री, लक्ष्मी, कमला, पद्मा, पद्मासना,
समुद्रजा, श्रीभार्गवी, क्षीरोदतनया।
रात- रात्रि, रैन, रजनी, निशा, यामिनी, तमी, निशि, यामा, विभावरी।
राजा- नृप, नृपति, भूपति, नरपति, नृप, भूप, भूपाल, नरेश, महीपति,
अवनीपति।
रात्रि - निशा, क्षया, रैन, रात, यामिनी, शर्वरी, तमस्विनी,
विभावरी।
रामचन्द्र - अवधेश, सीतापति, राघव, रघुपति, रघुवर, रघुनाथ,
रघुराज, रघुवीर, रावणारि, जानकीवल्लभ, कमलेन्द्र, कौशल्यानन्दन।
रावण - दशानन, लंकेश, लंकापति, दशशीश, दशकंध, दैत्येन्द्र।
राधिका - राधा, ब्रजरानी, हरिप्रिया, वृषभानुजा।

लड़का - बालक, शिशु, सुत, किशोर, कुमार।
लड़की - बालिका, कुमारी, सुता, किशोरी, बाला, कन्या।
लक्ष्मी- कमला, पद्मा, रमा, हरिप्रिया, श्री, इंदिरा, पद्मजा,
सिन्धुसुता, कमलासना।
लक्ष्मण - लखन, शेषावतार, सौमित्र, रामानुज, शेष।
लौह - अयस, लोहा, सार।लता - बल्लरी, बल्ली, बेली।

वायु - हवा, पवन, समीर, अनिल, वात, मारुत।
वसन - अम्बर, वस्त्र, परिधान, पट, चीर।
विधवा - अनाथा, पतिहीना, राँड़।
विष- ज़हर, हलाहल, गरल, कालकूट।
वृक्ष- पेड़, पादप, विटप, तरू, गाछ, दरख्त, शाखी, विटप, द्रुम।
विष्णु- नारायण, दामोदर, पीताम्बर, चक्रपाणी।
विश्व - जगत, जग, भव, संसार, लोक, दुनिया।
विद्युत - चपला, चंचला, दामिनी, सौदामिनी, तड़ित, बीजुरी,
घनवल्ली, क्षणप्रभा, करका।
वारिश - वर्षण, वृष्टि, वर्षा, पावस, बरसात।
वीर्य - जीवन, सार, तेज, शुक्र, बीज।
वज्र - कुलिस, पवि, अशनि, दभोलि।
विशाल - विराट, दीर्घ, वृहत, बड़ा, महा, महान।
वृक्ष - गाछ, तरु, पेड़, द्रुम, पादप, विटप, शाखी।

शिव- भोलेनाथ, शम्भू, त्रिलोचन, महादेव, नीलकंठ, शंकर।
शरीर- देह, तनु, काया, कलेवर, अंग, गात।
शत्रु- रिपु, दुश्मन, अमित्र, वैरी, अरि, विपक्षी, अराति।
शिक्षक- गुरु, अध्यापक, आचार्य, उपाध्याय।
शेर - केहरि, केशरी, वनराज, सिंह, शार्दूल, हरि, मृगराज।
शेषनाग - अहि, नाग, भुजंग, व्याल, उरग, पन्नग, फणीश, सारंग।
शुभ्र - गौर, श्वेत, अमल, वलक्ष, शुक्ल, अवदात।
शहद - पुष्परस, मधु, आसव, रस, मकरन्द।
श्र

षंड - हीजड़ा, नपुंसक, नामर्द।
षडानन - षटमुख, कार्तिकेय, षाण्मातुर।

सीता - वैदेही, जानकी, भूमिजा, जनकतनया, जनकनन्दिनी,
रामप्रिया।
साँप- अहि, भुजंग, ब्याल, सर्प, नाग, विषधर, उरग, पवनासन।
सूर्य- रवि, सूरज, दिनकर, प्रभाकर, आदित्य, दिनेश, भास्कर,
दिनकर, दिवाकर, भानु, अर्क, तरणि, पतंग, आदित्य, सविता, हंस,
अंशुमाली, मार्तण्ड।
संसार- जग, विश्व, जगत, लोक, दुनिया।
सोना- स्वर्ण, कंचन, कनक, हेम, कुंदन।
सिंह- केसरी, शेर, महावीर, हरि, मृगपति, वनराज, शार्दूल, नाहर,
सारंग, मृगराज।
समुद्र- सागर, पयोधि, उदधि, पारावार, नदीश, जलधि, सिंधु,
रत्नाकर, वारिधि।
सम - सर्व, समस्त, सम्पूर्ण, पूर्ण, समग्र, अखिल, निखिल।
समीप - सन्निकट, आसन्न, निकट, पास।
समूह- दल, झुंड, समुदाय, टोली, जत्था, मण्डली, वृंद, गण, पुंज,
संघ, समुच्चय।
सभा - अधिवेशन, संगीति, परिषद, बैठक, महासभा।
सुन्दर - कलित, ललाम, मंजुल, रुचिर, चारु, रम्य, मनोहर, सुहावना,
चित्ताकर्षक, रमणीक, कमनीय, उत्कृष्ट, उत्तम, सुरम्य।
सन्ध्या - सायंकाल, शाम, साँझ, प्रदोषकाल, गोधूलि।
स्त्री- सुन्दरी, कान्ता, कलत्र, वनिता, नारी, महिला, अबला, ललना,
औरत, कामिनी, रमणी।
सुगंधि- सौरभ, सुरभि, महक, खुशबू।
स्वर्ग- सुरलोक, देवलोक, दिव्यधाम, ब्रह्मधाम, द्यौ, परमधाम,
त्रिदिव, दयुलोक।
स्वर्ण - सुवर्ण, कंचन, हेन, हारक, जातरूप, सोना, तामरस, हिरण्य।
सरस्वती - गिरा, शारदा, भारती, वीणापाणि, विमला, वागीश,
वागेश्वरी।
सहेली - आली, सखी, सहचरी, सजनी, सैरन्ध्री।
संसार - लोक, जग, जहान, जगत, विश्व।

हस्त - हाथ, कर, पाणि, बाहु, भुजा।
हिमालय- हिमगिरी, हिमाचल, गिरिराज, पर्वतराज, नगेश।
हिरण - सुरभी, कुरग, मृग, सारंग, हिरन।
होंठ - अक्षर, ओष्ठ, ओंठ।
हनुमान - पवनसुत, पवनकुमार, महावीर, रामदूत, मारुततनय,
अंजनीपुत्र, आंजनेय, कपीश्वर, केशरीनंदन, बजरंगबली, मारुति।
हिमांशु - हिमकर, निशाकर, क्षपानाथ, चन्द्रमा, चन्द्र, निशिपति।
हंस - कलकंठ, मराल, सिपपक्ष, मानसौक।
हृदय- छाती, वक्ष, वक्षस्थल, हिय, उर।
हाथ- हस्त, कर, पाणि।
हाथी- नाग, हस्ती, राज, कुंजर, कूम्भा, मतंग,सिंधु , वारण, गज, द्विप,
करी, मदकल।

Sunday, 10 May 2015

MUGAL STHAPATY KALA


भारत में मुग़ल स्थापत्य कला- मध्य काल में भारतीय स्थापत्य कला का विकास वस्तुत: हिन्दू और मुस्लिम दोनों जातियों की सम्मिलित प्रतिभा के कारन हुआ। कुछ विद्वानों ने मध्य कालीन स्थापत्य कला शेली को पाठान, सरासिन अथवा इस्लामिक शेली के नाम से पुकारा है, जो युक्तिसंगत नहीं है। वस्तुत: इस शेली को इंडो इस्लामिक शेली की संज्ञा से विभूषित करना ही उपयुक्त होगा क्यूकि इसमें हम भारतीय तथा इस्लामिक दोनों शॆलियो का सुंदर समन्वय पाते हैं।
     भारत वर्ष में जब इस्लाम का प्रवेश हुआ, इस्लाम के अनुयायी इस शेली को भी अपने साथ लाये परन्तु कुछ कारणों से इस शेली का स्वतंत्र विकास नही हो पाया। दुसरे शब्दों में मुसलमानों को भारत में प्रचलित प्राचीन भारतीय स्थापत्य शेलीयो से सामंजस्य कर निर्माण कार्य करने पड़े। भारत में पहले से ही कही अधिक उन्नत ब्राह्मण,जैन,बोद्ध स्थापत्य शेलिया प्रचलित थी जिस शेली को हम इन्डो इस्लामी शेली के नाम से जानते है वः वास्तव में भारतीय एवम इस्लामिक शेलियो का सम्मिश्रण ही हैं। मुग़ल काल इंडो इस्लामिक स्थापत्य कला शेली की पराकाष्टा का युग मन जाता है।

पर्सी ब्राउन ने मुग़ल काल को भारतीय वास्तुकला का 'ग्रीष्म काल' माना हैं, जो प्रकाश एवम उर्वरा का प्रतीक माना जाता हैं।

स्मिथ ने मुगलकालीन वास्तुकला को कला की रानी कहा है।

मुग़ल स्थापत्य कला का काल मुख्य रूप से 1526 ईस्वी से लेकर 1857 ईस्वी तक मन जाता हैं। मुग़ल स्थापत्य कला में फारस,तुर्की,मध्य एशिया,गुजरात,बंगाल,जोनपुर आदि स्थानों की शेलियो का अनोखा मिश्रण हुआ था। मुग़ल काल में पहली बार पत्थर के अलावा प्लास्टर एवम पच्चीकारी का प्रयोग किया गया। सजावट के लिए मार्बल पर जवाहरात एवम कीमती पत्थर की जडावत का प्रयोग, पथरों को काटकर फूल पत्ते, बेल बूटे एवम गुम्बदों तथा बुर्जों को कलश से सजाया जाता था।
            इस्लामी एवम भारतीय शेलियो की विशेताए तथा उनका एक दुसरे पर प्रभाव--  इस्लामी स्थापत्य कला की विशष्टिता गुम्बंद, ऊँची ऊँची मीनारे,मेहराब तथा डांटे थी और भारतीय शिल्पकला की विशेषता चोरस छत,छोटे खम्बे नुकीले मेहराब और तोंडे थी। सम्पूर्ण मध्य काल में भारतीय स्थापत्य कला ने अनेक तरीको से इस्लामी शेली को गहरे रूप से प्रभावित किया।
प्रथम मुसलमानों को भारत वर्ष में स्थानीय कारीगरों तथा शिल्पियों को भवनों के निर्माण हेतु नियुक्त करना पड़ा। इन लोगो को अपनों देशी स्थापत्य कला के रूप तथा पद्धति का स्पष्ट ज्ञान था। अत: उन्होंने जाने अनजाने रूप में इस्लामी इमारतो में अपनी स्थानीय शिल्प कला कारीगरी का समावेश कर दिया। वस्तुत: इन इमारतो को बनाने में विदेशी मष्तिष्क काम कर रहा था किन्तु हाथ भारतीयों का था। द्वितीय प्राय: सभी प्रारंभिक सुल्तानों ने धर्मान्धता के कारण हिन्दू और जैन मंदिरों को तोडा और उन्ही के मलबे से उन्होंने अपने महल मस्जिद और गुम्बदो का निर्माण करवाया। अत: उनके भवनों पर भारतीयता की छाप पड गयी। तृतीय , यद्यपि हिन्दू और मुसलमानों के भवनों में अनेक विभिन्तायें थी परन्तु कुछ समानताये भी थी। अत: थोडा सा परिवर्तन कर भारतीय भवनों को इस्लामिक रूप दे दिया गया और इस तरह मध्य कालीन भवनों पर भारतीयता की छाप अंकित हो गयी।

बाबर (1526 ई.-1530 ई.)   प्रथम मुग़ल सम्राट जिसका शासन काल काल बहुत कम था परन्तु  स्थापत्य कला का उच्चकोटि का पारखी होने के कारण उसे भारतीय भवनों की समीक्षा करने का अवकाश मिल ही गया। उसे तुर्क एवम अफगान शासको द्वारा दिल्ली एवम आगरे की इमारते पसंद नहीं आई और वह के वास्तु कला के नमूने उसे निचे स्तर के प्रतीत हुए। किन्तु बाबर को ग्वालियर की शिल्प कला ने बहुत अधिक प्रभावित किया और उसने मानसिंह एवम विक्रमजीत के महलों को अद्वितीय बताया। संभव है अपने महलो के निर्माण में वह ग्वालियर शेली से प्रभावित हुआ।
       बाबर ने आगरा,फतेहपुर सीकरी,बयाना,धोल पुर,ग्वालियर,अलीगढ आदि में भवन निर्माण हेतु सैकड़ो कारीगर नियुक्त किये थे। इन क्षेत्रो में उसने भवन निर्माण न करवा कर मंडप,स्नानागार,कूए,तालाब, फ़व्वारे ही बनवाए थे।
      बाबर के द्वारा निर्मित केवल दो तीन भवन ही उपलब्ध है। ये भवन है पानीपत के काबुली बाग़ में स्थित मस्जिद दूसरी संभल की जमा मस्जिद और तीसरी आगरा के किले के अंदर निर्मित मस्जिद। उसके काल की एक अन्य मस्जिद अयोध्या में भी पाई गई है जिसे सम्राट की आज्ञा से अबुल बारी न बनवाया था। बाबर द्वारा निर्मित भवन शिल्प कला की दृष्टि से बहुत सामान्य है।

हुमायु (1530ई.-1540ई. और 1555ई.-1556ई.)   हुमायु द्वारा निर्मित केवल दो मस्जिदों के अवशेष आज मौजूद है आगरा में निर्मित मस्जिद एवम दूसरी फतेहाबाद की विशाल एवम संतुलित मस्जिद। फतेहाबाद की मस्जिद का निर्माण 1540ई. में किया गया। इसमें फारसी शॆलि में प्रचलित प्रस्तर मीना कारी सज्जा का पर्योग किया गया सर्वप्रथम यह प्रयोग 15 वी शताब्दी के उत्तरार्ध में बहमनी शाशको ने किया। उसने 1533ई. में दीनपनाह धरम का शरण स्थल नामक नगर की नीव डाली। इस नगर जिसे पुराना किला के नाम से जाना जाता है की दीवारे रोड़ी से निर्मित थी। इसे बाद में शेर शाह ने तुडवा दिया।

शेरशाह सूरी (1540ई.-1545ई.) इस्लाम शाह सूरी(1545ई.-1554ई.) शेर शाह ने हुमायूँ के द्वारा निर्मित दिन पनाह को नष्ट करवा कर उसके भग्नावशो पर पुराने किले का निर्माण करवाया। इनमे उसने एक मस्जिद भी बनवाई थी जो पुराने किले की मस्जिद अथवा किले ए कुहना मस्जिद के नाम से प्रसिद्ध है। अकबर के शासन के पूर्व की इंडो मुस्लिम शिल्प कला का सर्वश्रेष्ठ नमूना सहसा राम में झील केंद्र में एक ऊँचे टीले पे निर्मित शेरशाह का मकबरा है। बाहय निर्माण की दृष्टि से शेरशाह का मकबरा इस्लामी ढंग का बना हुआ है किन्तु इसका भीतरी भाग तोरणों था हिन्दू ढंग के खम्बो से सजा हुआ है। शेर शाह के उत्तराधिकारियो के शासन काल में किसी उल्लेखनीय भवन का निर्माण नहीं हो पाया।

अकबर (1556ई.-1605ई.) अकबर ने विभिन्न स्थानों की कारीगरी का उपयोग कर एक नूतन भारतीय अथवा राष्ट्रिय शॆलि का निर्माण किया और इस शेली में उसने आगरा फतेपुर सीकरी, लाहोर,इलाहबाद,अटक आदि विभिन्न स्थानों में अनेक दुर्ग,राजप्रसाद,भवन,मस्जिद,मकबरे आदि बनवाए। अकबर के शासन काल की पहली इमारत दिल्ली स्तिथ हुमायूँ का मकबरा है। इसका निर्माण हुमायूँ की विधवा पत्नी हाजी बेगम की देख रेख में हुआ था। यह 1569ई. में बनकर तॆयार हुआ। और इसमें फारसी व भारतीय कलाओ का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। भारत में निर्मित उभरी हुयी दोहरी गुम्बंद का यह पहला उदाहरण है। इसके बाद आगरे,लाहौर के किले का निर्माण हुआ। आगरे के लाल किले की दीवारे लगभग 70 फुट ऊँची है।तथा इसका घेराव डेढ़ मील(2.4 km) है। आगरे के किले में 2 मुख्य द्वार है जिनमे से एक पश्चिम की और दूसरा इस से छोटा अमर सिंह द्वार है। किले के पश्चिम द्वार को दिल्ली व हाथी द्वार के नाम से जाना जाता है क्योकि इसके मुख्य मेहरब पर दो हाथियों की आकृति उकेरी हुई है। इस किले के भीतर अकबर ने लगभग 500 इमारतों का निर्माण करवाया अकबर द्वारा निर्मित ये इमारते लाल बलुआ पत्थर की थी जिन्हें शाहजंहा ने तुडवा कर इसके स्थान पर संगमरमर की नई इमारतों का निर्माण करवाया। किले में अकबर द्वारा निर्मित सर्वाधिक महत्वपूर्ण इमारते जहाँगीरी महल एवम अकबरी महल है। इनके निर्माण में भी लाल पत्थरों का पर्योग किया गया है। जहाँगिरी महल अकबरी महल की अपेक्षा अधिक बड़ा एवम सुंदर है। जहाँगीरी महल हिन्दू डिजाइन का है और इसमें सजावट भी हिन्दू ढंग की है। इन कारणों से इसे सरलता से हिन्दू भवन कहा जा सकता है। आगरे किले की रूप रेखा ग्वालियर के किले से मिलती है जिसे मान सिंह ने बनवाया था।
       लाहोर के किले का निर्माण भी लगभग आगरे के किले के निर्माण के समय ही हुआ था। दोनों किलों में समरूपता भी है, किन्तु लाहोर के किले की सजावट अपेक्षा कृत घनी है। इसके अतिरिक्त अकबर ने इलाहाबाद एवम आमेर में भी किले बनवाए।
     फतेहपुर सीकरी (स्थापना 1569ई.) (1571ई.-1585ई. तक राजधानी रही) अकबर ने एक नयी राजधानी फतेपुर सीकरी का निर्माण करवाया। यहाँ भी उसने राजप्रसाद,बेगमों, शहजादों के महल कार्यालय आदि का निर्माण करवाया। सिकरी में सम्राट ने अनेक भवनों का निर्माण करवाया किन्तु इनमे मुहाफ़िज़ खाना,दीवाने आम,दीवाने ख़ास,खजाना महल,पञ्च महल,महारानी मरियम का महल,तुर्की सुल्ताना का महल,योधा बाई का महल और बीरबल का महल विशेष रूप से उल्लेखनीय है। अधिकांश इमारतो में हिन्दू मुस्लिम कलाओ का सुंदर समन्वय दृष्टिगोचर होता है। किन्तु इनमे हिन्दू शॆलि की प्रधानता है। इनमे से कुछ की सजावट जेसे दीवाने खास में लगे हुए खम्बो की शोभा बढ़ाने वाले तोड़े , पच महल और योद्धा बाई के महल में लगे हुए उमरे घंटे तथा जंजीर और मरियम के महल में पत्थरों पर खोदे गए पशुओ के चित्र आदि हिन्दू एवम जैन शेलीयों के है। किले के अंदर निर्मित जामा मस्जिद और उसका परवेश द्वार जिसे अकबर ने अपनी दक्षिण विजय के बाद नए सिरे से बनवाया, बुलंद दरवाजे के नाम से जाना जाता है। दरवाजे की ऊँचाई 134 फीट व सीढयो
की 72 फीट इस प्रकार यह 176 फीट ऊंचा है। सीकरी के निर्माण में 11 वर्ष लगे। बाद में सलीम चिश्ती की दरगाह आदि बने।
इसके अतिरिक्त अकबर ने मेरटा, आमेर में मस्जिद का निर्माण करवाया इलाहबाद में उसने 40 खम्बो का महल तथा सिकंदरा में अपने मकबरे की योजना तैयार की। अकबर के मकबरे का निर्माण 1613ई. में उसके पुत्र जहाँगीर ने करवाया।

जहाँगीर(1605ई.-1627ई.) - जहाँगीर के शासन काल में एतमादूद्दोला का मकबरा बनवाया। एतमादूद्दोला की ख्याति इसमें संगमरमर के उपर पच्चीकारी के कारन है
। यह सफ़ेद संगमरमर का बना हुआ है और इसमें कीमती पत्थर भी लगे हूए है। इस मकबरे का निर्माण सोलहसो ई. में नूरजहाँ ने करवाया। यह प्रथम ऐसी ईमारत है (मुग़ल काल) जो पूर्ण रूप से बेदाग़ सफ़ेद संगमरमर से निर्मित है। सर्वप्रथम इस ईमारत में पित्रादूरा नाम का जड़ाऊ काम किया जडावत के कार्य का एक पहले का नमूना उदयपुर के गोलमंडल मंदिर में पाया जाता है। मकबरे के अन्दर निर्मित एतमादूद्दोला एवम उसकी पत्नी की कब्रे पीले रंग के कीमती पत्थर से निर्मित है।
     सिकंदरे में अकबर के मकबरे का निर्माण कार्य यद्यपि अकबर के योजना के अनुरूप उसी के शासन काल में प्रारंभ किया गया। इसका समापन 1613ई. में जहाँगीर की देख रेख में हुआ। यह मकबरा चार बाग़ पद्धति के उद्यान में स्तिथ है। वर्गाकार योजना का यह मकबरा पांच तल ऊंचा है जिसका प्रतेक तल क्रमश: छोटा होकर इसे पिरामिड नुमा आकर देता है। अकबर की कब्र भवन से चारो और से घिरी  है तथा ये ईंट और चुने के गारे से बनी है। उपरी मंजिल सफ़ेद संगमरमर तथा अन्य सम्पूर्ण मकबरा लाल बलुआ पत्थर का बना है। यह मकबरा 119 एकड में फैला हुआ है।ओरंगजेब के समय में जाट शासक रजा राम के नेतृत्व में जाटों ने अकबर की कब्र खोदकर इसकी अस्थियों को अग्नि में समर्पित कर दिया एवम मकबरे को नुकसान भी पहुँचाया।
    जहाँगीर के शासन काल में अन्य उलेखनीय भवन लाहोर के निकट शाहदरा में स्तिथ उसका मकबरा है जिसका नक्शा व योजना उसने खुद तैयार किया था। इस मकबरे के उपर संगमरमर का एक मंडप था जिसे सिखों ने उतार लिया था। समाधी के भीतरी हिस्सों में संगमरमर की पच्चिकारो तथा चिकने और रंगीन सुंदर पल्स्तरो का पर्योग किया गया है।

शाहजहाँ (1627ई. -1658ई.) मुग़ल स्थापत्य कला के इतिहास में शहाजहां का शासन काल सर्वाधिक महत्वपूर्ण साबित हुआ। इस मुग़ल कालावधि में भारतीय वास्तुकला अपने चरमोत्कर्ष को प्राप्त हुई। शाहजहाँ के शासन काल को अगर स्वर्ण युग कह कर पुकारा जाता है तो इसमें उसके द्वारा निर्मित भवनों का सर्वाधिक योगदान है। शाहजहाँ को उसकी इसी कला के प्रति अगाध प्रेम होने के कारण निर्माताओं का राजकुमार कहा जाता है। शाहजहाँ की देख रेख और उसके संगरक्षण में आगरा,लाहोर,दिल्ली,काबुल,कश्मीर,अजमेर,कंधार,अहमदाबाद आदि अनेक स्थानों में सफ़ेद संगमरमर के महल,मस्जिद,मंडप,मकबरें आदि का निर्माण किया गया। शाहजहाँ ने आगरे तथा लाहोर में अकबर के द्वारा लाल पत्थरों से निर्मित अनेक भवनों को नष्ट करवा कर उनके स्थान पर सफ़ेद संगमरमर के भवनों का निर्माण करवाया। आगरे के किले में सम्राट ने दीवाने आम, दीवाने खास, खास महल, शीश महल, मोती मस्जिद, मुसम्मन बुर्ज तथा अनेक बनावटों का निर्माण करवाया। दीवाने खास की सुन्दरता इसमें दोहरे खम्बों और सजावटों के कारन है। मुस्सन बुर्ज किले की लम्बी चोड़ी दिवार पर अप्सरा कुञ्ज के सामान शोभायमान है। मोती मज्सिद की कारीगरी मुग़ल कालीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना है।
     1638 ई. में दिल्ली में सम्राट ने एक नये दुर्ग का निर्माण करवाया जो दिल्ली के लाल किले के नाम से प्रसिद्ध है। उसके भीतर एक नगर बसाया गया जिसका नाम शाहजहानाबाद रखा गया। दिल्ली के लाल किले के भीतर सफ़ेद संगमरमर की सुंदर इमारते बनवाई गयी जिनमे मोती महल, हीरा महल, रंग महल , दीवाने आम , दीवाने खास आदि उल्लेखनीय है। लाल किले में शाहजहाँ ने संगीत भवन अनेक दफ्तर था बाज़ार भी बनवाये। हर महल के सामने फूलों की क्यारियां एवं फव्वारे निर्मित किये गए। जिस से उनकी सुन्दरता में चार चाँद लग गये। सरे महल, जाली, खंबो,महराबों और चित्रों से सुसज्जित है। इन महलो के फर्श संग मरमर के बने हुए है। लाल किले में स्थित भवनों में रंग महल की शोभा अति न्यारी है। इसमें सुंदर फव्वारों की भी व्यवस्था की गयी। शाहजहाँ के द्वारा इसकी एक दिवार पर खुदवाया गया यह वाक्य " अगर धरती पर खिन स्वर्ग एवं आनंद है तो वह यहीं है"। बिलकुल सत्य प्रतीत होता है।
शाहजहाँ ने लाहोर के किले में 40 खम्बो का दीवाने आम, मुसलमान बुर्ज, शीश महल, ख्वाबगाह आदि का निर्माण करवाया। शाहजहाँ ने शाहजहानाबाद में प्रसिद्ध जमा मस्जिद का निर्माण करवाया। यह मस्जिद अपनी विशालता एवं सुन्दरता के लिए प्रसिद्ध है। किन्तु कला की दृष्टि से उत्कृष्ट नही है।
       शाहजहाँ द्वारा निर्मित ताजमहल सर्वाधिक विख्यात व महत्वपूर्ण समझा जाता है। कहा जाता है इसका निर्माण 1631 ई. से लेकर 1953 ई. तक हुआ। इस प्रकार ताजमहल निर्माण में 22 वर्ष व 9 करोड रूपये लगे। संभवत ताजमहल की योजना उस्ताद अहमद लाहोरी द्वारा तैयार की गयी तथा इसके निर्माण हेतु देश विदेश से कारीगर नियुक्त किये गए। पर्सी ब्राउन के मत में ताजमहल का निर्माण प्राय मुसलमान शिल्पकारो द्वारा ही हुआ था किन्तु इसकी चित्रकारी सामान्यत: हिन्दू कलाकारों के द्वारा की गयी थी। और पेत्रादुरा जेसी कठिन पच्चीकारी कन्नोज के हिन्दू कलाकारों को सोपी गयी। ताज की रूपरेखा प्रधान रूप से फ़ारसी ही है, किन्तु कुछ अंश में हिन्दू शिल्प कला तथा हिन्दू साजो सज्जा का सम्मिश्रण भी हम इए पाते है। फिर भी इसके डिजाइन को पूर्णत: मोलिक नहीं खा जा सकता। अनुमानत: यह बीजापुर के सुल्तानों के द्वारा निर्मित मकबरों एवम शेरशाह के मकबरे से बहुत अधिक प्रभावित है।

ओरंगजेब (1658 ई.-1707ई.)   ओरंगजेब अपनी धार्मिक कट्टरता के कारण सभी कलाओ का शत्रु बन बैठा था। ओरंगजेब ने किसी भी श्रेष्ट इमारत का निर्माण नहीं करवाया। उसने 1649ई. में दिल्ली की मोती मस्जिद के अधूरे कार्य को पूरा करवाया। 1674 ई. में लाहोर में बादशाही मस्जिद, 1678 ई. में ओरंगाबाद में "बीबी का मकबरा", अपनी पत्नी रमिया दोरानी की स्मृति में बनवाया। जो ताजमहल की फूहड़ नक़ल है।
     औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुग़ल स्थापत्य कला को पुन: पनपने का अवसर नहीं मिला और उतर मुग़ल कालीन सम्राटो के काल में जिन इमारतो का निर्माण किया वे बहुत निम्न कोटि की प्रतीत होती है तथा शिल्पकला का खोकला पन प्रगट करति है।
         मुग़ल सामंतों, हिदू रजवाडो द्वारा निर्मित भवन- बाद के भवनों में जयपुर का हवा महल,बीजापुर का गोल गुमद,वृन्दावन का गोविन्द देव तथा मदन मोहन के मंदिर, गोवेर्धन का हमीर देव मंदिर, बुन्देल खंड में सोनागढ़ का जैन मंदिर, ग्वालियर का मान मंदिर, अमृतसर का सिख मंदिर एवं राजपुताना में हिन्दू शासकों द्वारा निर्मित मंदिर एवं भवन किले उल्लेखनीय है।
               नष्ट की गयी इमारतों में, जिनका उल्लेख किया गया है। उनमें वीर सिंह बुंदेला द्वारा निर्मित ओरछा के मंदिर और महल , मथुरा के केशव रॉय का मंदिर तथा गोकुल वृन्दावन , हरिद्वार, प्रयाग(इलाहबाद), वाराणसी एवम अन्य हिन्दू तीर्थ स्थानों के अनेक अनेक मंदिर महत्वपूर्ण कहे जा सकते है।